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गांव के बारे में

पाली जिले की पहाड़ियों और कृषि भूमि के बीच बसा बिथूड़ा पीरां, अपनी जैन विरासत, मारवाड़ी परंपरा और मेहनतकश समुदाय के लिए जाना जाता है।

इतिहास व नामकरण

मूल और नामकरण

स्थानीय जनश्रुति के अनुसार बिथूड़ा पीरां का नाम एक प्राचीन सूफी संत (पीर) की समाधि के नाम पर पड़ा, जो गांव की सीमा पर आज भी श्रद्धा का केंद्र है। सदियों से यह गांव जैन व्यापारी परिवारों, कृषक समुदायों और शिल्पकारों का संगम स्थल रहा है, जिसने यहां की सांस्कृतिक विविधता को समृद्ध किया।

भूगोल

भौगोलिक स्थिति

जोधपुर-अहमदाबाद मार्ग से 8 किमी दूर, अरावली की तलहटी में स्थित, कृषि योग्य समतल भूमि व छोटी पहाड़ियों से घिरा।

जलवायु

अर्ध-शुष्क जलवायु

गर्मियों में 42°C तक तापमान, मानसून जुलाई-सितंबर, औसत वार्षिक वर्षा 450mm — जल संरक्षण यहां जीवनशैली का हिस्सा है।

भाषा

मारवाड़ी व हिंदी

दैनिक बोलचाल मारवाड़ी बोली में, शिक्षा व सरकारी कार्य हिंदी में; युवा पीढ़ी अंग्रेज़ी भी सीख रही है।

जनसांख्यिकी

जनसंख्या व सामाजिक संरचना

0कुल जनसंख्या
0पुरुष
0महिलाएं
0परिवार
0साक्षरता
0कृषि पर निर्भर
संस्कृति व त्योहार

परंपराएं जो हमें जोड़ती हैं

गणगौर उत्सव

गणगौर

चैत्र माह में महिलाओं का प्रमुख पर्व, पारंपरिक गीत व शोभायात्रा।

तीज उत्सव

तीज

सावन में झूले व मेहंदी के साथ मनाया जाने वाला उत्सव।

Jain Temple

पर्युषण पर्व

जैन समुदाय का प्रमुख आध्यात्मिक पर्व, तपस्या व क्षमापना।

Camel Fair

पशु मेला

वार्षिक पशु मेले में क्षेत्रभर से व्यापारी व किसान भाग लेते हैं।

अर्थव्यवस्था

कृषि, पशुपालन व स्थानीय व्यापार

कृषि

बाजरा, ज्वार, सरसों व ग्वार की खेती प्रमुख; सोलर पंप से सिंचाई क्षमता बढ़ी है।

पशुपालन

गाय, भैंस व बकरी पालन आय का महत्वपूर्ण स्रोत; दुग्ध सहकारी समिति सक्रिय।

स्थानीय व्यापार

किराना, हस्तशिल्प व निर्माण सामग्री की छोटी दुकानें गांव के बाज़ार में सक्रिय।